नन्ही सी परी-राकेश कुमार

नन्ही सी परी-राकेश कुमार

एक नन्ही सी परी, सबसे क्यों डरी,
आगे आगे भागे ,क्यों न दामन साजे,
देखो सबकी नज़रे हरपाल इसको घूरे,
कोई न गले लगाए,
न इसका कोई साथी ,न इसका कोई ठिकाना,
फिर भी जग को अपना माना,
माँ -बाप का दिल पत्थर बन पाया,जब से दामन छुड़ाया,
हाथ जोड़ कर बैठी, मंदिर म जाकर पूछे,
मुझको क्यों ह बनाया,एक नन्ही सी पारी,,,,

 

 

   Rakesh Kumar Mastanaराकेश कुमार

मथुरा, उत्तर परदेश

Rakesh Kumar

मैं राकेश कुमार कोसी कलान मथुरा उत्तरप्रदेश का निवासी हूँ। मैं वीर रस और श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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