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नन्ही सी जान को दबोचा था-त्रिशिका श्रीवास्तव

हवस के भूखे भेड़ियों ने नन्ही सी जान को दबोचा था
दरिंदों ने उसकी अस्मत लूटी, उसके जिस्म को नोचा था

उन वहशी हैवानो ने इन्सानियत को शर्मसार किया
अपनी भूख मिटा कर उस नन्ही सी जान को मार दिया

उस बाप पे क्या बीती होगी, माँ कैसे संभल पाई होगी
जब उनके घर के आंगन में बेटी की लाश आई होगी

कलयुग में सब दुर्योधन है, गोविंद की न आस लगाओ
द्रौपदी ख़ुद हथियार उठा कर दुर्योधन को मार गिराओ

  • त्रिशिका श्रीवास्तव “धरा”
    कानपुर (उ.प्र.)

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