नारी – सचिन ओम गुप्ता

नारी – सचिन ओम गुप्ता

Sachin Om Gupta

 

 

 

जब नारी में शक्ति सारी
फिर क्यों नारी हो बेचारी
नारी का जो करे अपमान
जान उसे नर पशु समान
हर आंगन की शोभा नारी
उससे ही बसे दुनिया प्यारी
राजाओं की भी जो माता
क्यों हीन उसे समझा जाता
अबला नहीं नारी है सबला
करती रहती जो सबका भला
नारी को जो शक्ति मानो
सुख मिले बात सच्ची जानो
क्यों नारी पर ही सब बंधन
वह मानवी , नहीं व्यक्तिगत धन
सुता बहु कभी माँ बनकर
सबके ही सुख-दुख को सहकर
अपने सब फर्ज़ निभाती है
तभी तो नारी कहलाती है
आंचल में ममता लिए हुए
नैनों से आंसु पिए हुए
सौंप दे जो पूरा जीवन
फिर क्यों आहत हो उसका मन
नारी ही शक्ति है नर की

नारी ही है शोभा घर की
जो उसे उचित सम्मान मिले
घर में खुशियों के फूल खिलें
नारी सीता नारी काली
नारी ही प्रेम करने वाली
नारी कोमल नारी कठोर
नारी बिन नर का कहां छोर
नर सम अधिकारिणी है नारी
वो भी जीने की अधिकारी
कुछ उसके भी अपने सपने
क्यों रौंदें उन्हें उसके अपने
क्यों त्याग करे नारी केवल
क्यों नर दिखलाए झूठा बल
नारी जो जिद्द पर आ जाए
अबला से चण्डी बन जाए
उस पर न करो कोई अत्याचार
तो सुखी रहेगा घर-परिवार
जिसने बस त्याग ही त्याग किए
जो बस दूसरों के लिए जिए
फिर क्यों उसको धिक्कार दो
उसे जीने का अधिकार दो
जब नारी में शक्ति सारी
फिर क्यों नारी हो बेचारी|

Sachin om Guptaसचिन ओम गुप्ता,
चित्रकूट धाम (उत्तर प्रदेश)

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