पैंगाम-नुज़हत राणा रूही

पैंगाम-नुज़हत राणा रूही

बेटियों को यों ही रुसवा न होने दो ।
बेटियों के कोमल गात में तलवार सी चमक भरो ।
हकुके हक का फरमान याद कराओ ।
अपनी पहचान का भी हकदार बनाओ ।

उस नाजुक अंकुर को शक्त दरखत बनाओ ।
लता की झुइमुयी शाख न बनने दो ।
उसे उसके बल का एहसास कराओ ।
विरोधों को जीतने कला सिखाओ ।

मर्दों से बड़ा बड़ी जरूरी नहीं ।
न मर्दों से कोई होरा-होड़ी ।
जब उन्हें निकाह में लो तो,
उसे खिलौना नहीं,हमसफर बनाओ ।

रुसवा ना फिर कोई बेटी होगी ।
ना ही कोई गुमनामी डूबी हायभरी बदुआ होगी।
ना भटकेगी फिर औलादें ।
फिर देखो, कैसे समाज है नहीं बदलती ।

 

       नुज़हत राणा रूही
       सऊदी ,अरब

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