पानी में आग लगा देँगे

पानी में आग लगा देँगे

पहचानने को हम भुलेँ नहिँ
आँख मुंदकर हम बेठेँ नहिँ
स्वतंत्रता हमारी थी और हमारी रहेगी
देश के लिए कल वो मरेँ,
तो आज हम भी मर सकतेँ हैँ
भारत माता के अरमान पुरे कर सकतेँ हैँ
पर साथी मेरे गुमराह हो जाते हैँ
थोडेँ से लालच मेँ नुक्सान देश को पँहुचा देते हैं
भुल जातेँ हैँ वो जो आए थे देश के लिए
पर अपने आप मेँ खो जाते हैँ
पर युँ मत क्हना कि हम हो ग्ए हैँ स्वार्थी
देश के लिए हम ऊठां देँगे दुशमनोँ की अर्थी
आसमाँ को चरणोँ मेँ झुका देँगेँ
रुख हवा का बदल देँगेँ
आपको कोई कष्ट ना हो
वरना हम अपनी जान न्यौँछावर कर देँगेँ
युँ मत समझना के बना ले जाएगा तुम्हेँ कोई गुलाम
तेरे लिए हम पानी मेँ आग लगा देँगेँ

  • आशीष घोड़ेला

Ashish Ghorela

उभरते हुए रचनाकारों और लेखकों को एक समृद्ध मंच प्रदान करने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर 26 जनवरी 2017 को साहित्य लाइव की शुरवात की। जिससे उभरते हुए रचनाकारों का सम्पूर्ण विकास हो सके तथा हिंदी भाषा का प्रचार और विकास में वृद्धि हो सके। वैसे मैं हिसार (हरियाणा) का निवासी हूँ और दिशा-लाइव ग्रुप का संस्थापक हूँ।

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