पधार चुके हैं ऋतुराज – मुनमुन सिंह

पधार चुके हैं ऋतुराज – मुनमुन सिंह

अब पधार चुके हैं ऋतुराज
चारो ओर है चौमासा छाया।
जलधर भी गरजते है अंबर पर
शाखी भी लहराती है अवनी पर।
अब पधार चुके हैं ऋतुराज
समीर भी है अब महकती
सरिता भी है अब बहती।
कुश भी है अब लहराती।
अब पधार चुके हैं ऋतुराज
प्रसुन भी है अब महकते
पखेरु भी है अब हंसते।
सलील भी अब हैं रंग बदलती।
अब पधार चुके हैं ऋतुराज
प्रभा भी है अब कम नजर आती।
छाव भी है अब अधिक नजर आती।
अब पधार चुके हैं ऋतुराज

—मुनमुन सिंह

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