पानी की पुकार-पपुल कुमार यादव

पानी की पुकार-पपुल कुमार यादव

पानी हूँ मैं पानी हूँ तेरे
जीवन को पार लगा दूँगा।
तू अगर मुझे समझ न पाया
तुझे पानी- पानी कर दूँगा।।

मुझे बचाअो सही उपयोग
में लाओ घर हो चाहे खेत।
ऐसा न हो तेरे कारण यह
धरा बन जाए रेत ही रेत।।
तू  अगर मुझे समझ गया तो
तुझे सेर नहीं सवा सेर कर दूँगा।
तू अगर मुझे समझ न पाया
तुझे पानी -पानी कर दूँगा।।

मेरे उपकार पर गौर करो तुम
मैं ही तुम्हें जीवन हूँ देता ।
मुझमें ही तू विष डाल कर
जीवन दाता के प्राण क्यों लेता।।
तू अगर आज संभल गया तो
इस धरा में हीरा-मोती उगा दूँगा।
तू अगर  मुझे समझ न पाया
तुझे पानी – पानी कर दूँगा।।

मुझको किसी का डर नहीं
और न ही मुझे अभिमान है।
तुम आग बुझा कर देखो यारों
मगर आग लगाना आसान है।।
मैं तो स्वार्थ हीन हूँ सब गुणों
में ढ़ल कर दिखा दूँगा ।
तू अगर मुझे समझ न पाया
तुझे पानी – पानी कर दूँगा ।।

 

पपुल कुमार यादवPapul Kumar

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comments
  • Superb kash log smjh paaye…

    1+

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