पापा का बेटा – शुभम् लांबा

पापा का बेटा – शुभम् लांबा

पापा,
मैंने खुद के अंदर आपकी मुर्त को देखा है।
और जिम्मेदारियां निभाना मैंने आपसे ही सिखा है।
शायद निर्णय लेने की समझ नहीं है मुझे,
लेकिन रास्तें चुनना मैंने आपसे ही सिखा है।
पापा, मैंने खुद के अंदर आपकी मुर्त को देखा है।

 

दुसरों की परेशानियां कंधों पर उठाना मैंने आपसे ही सिखा है।
शायद रिश्तों की गहराई की समझ नहीं है मुझे,
लेकिन रिश्तों को निभाना मैंने आपसे ही सिखा है।
पापा, मैंने खुद के अंदर आपकी मुर्त को देखा है।

सबको एक-साथ लेकर चलना मैंने आपसे ही सिखा है।
शायद दुनिया-दारी की समझ नहीं है मुझे,
लेकिन समाज में इज्जत बनाना मैंने आपसे ही सिखा है।
पापा, मैंने खुद के अंदर आपकी मुर्त को देखा है।
और जिम्मेदारियां निभाना मैंने आपसे ही सिखा है।

….$❤️….✍️

Subham Lamba #शुभम् लांबा

Ravi Kumar

मैं रवि कुमार गुरुग्राम हरियाणा का निवासी हूँ | मैं श्रंगार रस का कवि हूँ | मैं साहित्य लाइव में संपादक के रूप में कार्य कर रहा हूँ |

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