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प्रकृति की बात-राहुल य़ादव

प्रकृति की बात ही निराली
हर तरफ है बस ! हरियाली
फलों से लहलहाती पेड़ों की डाली
ये फसलों का लहलहाना
शाम को बच्चों का खेलना
थोडी हंसी – थोडी लडाई
ना किसी से कोई अनबन
इसी को कहते हैं बचपन
इस प्रकृति की बात है निराली
उमड़ते-घुमड़ते बादलों का आना
इन ठंडी हवाओं का चलना
इन ऋतुओं का आना जाना
वृक्षों मे नये पत्तों का आना
सुबह – सुबह चिड़ियों का चहचहाना
शाम को ढलते सूरज को देखना
इस प्रकृति की बात ही निराली
— राहुल

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