पतिपरमेश्वर-रोहिताश सिंह

पतिपरमेश्वर-रोहिताश सिंह

मै भी अपनी मूर्खता पर हँसता और हँसाता हु,
शायद इसलिए ही पति परमेश्वर कहलाता हु, और पतियो कि कि तरह,
मैं भी खामोश सा रहता हूँ,
दुख हो सुख हो हर मौसम में
सदा एक सा रहता हूँ,
सदा एक सा………………………..।अब अपनी कहानी को कहता और बतलाता हु, की शादी के बाद,
मैं और मेरी आजदी को लग गया अब ताला,
रोज़ नोंक झोक से मेरा भी पड़ता पाला है,
वैसे बीवी मेरी एक झांसी की रानी है,
छोटी बातों पर गुस्सा नाक तक आता है
उसकी कुछ देर की शांति,
जवालामुखियो पर भी भारी है,
थोड़ी ही देर में जब गुस्सा शांत हो जाता है
विन्रमता और नम्रताओ का मेला लग जाता है,
सब कुछ पता होने पर भी ,
वो ऐसे मुस्काती है ,
जैसे कि घर की एक अकेली वासी है,
उसकी इस निर्मलता को मैं देखते जाता हूँ,
मैं उसके इस सदके में सब कुछ भुल जाता हूं सईद इसीलिए पति परमेश्वर कहलाता हु,

 

रोहिताश सिंह

अलवर राजस्थान

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