फौजी की ज़ुबान-राकेश मस्ताना

फौजी की ज़ुबान-राकेश मस्ताना

साथी घर जा कर मत कहना संकेत मैं बता लेना
यदि हाल मेरी माता पूछे तो जलता दीप भुजा देना इतने पे भी ना समजे तो दो आंसू तुम बहा। लेना

यदि हाल मेरी। बहेन पूछा तो सुने कलई देखा देना इतने पे भि ना समजे तो रखी तोड़ देखा लेना
यदि हाल मेरे पत्नी पूछा तो मस्तक तुम झुका देना इतने पे भी ना समजे तो मांग का सुंदर मेटा लेना
यदि हाल मेरा पापा पूछा तो हाथ को सेला देना इतने पके भी ना समजे तो लाठी तोड़ देखा लेना

यदि हाल मेरा बेटा पूछा तो सर उस का सला देना इतने पर भी ना समजे सीने से लगा लेना
यदि हाल मेरा भाई पुछे तो खाली रहा देखा देना इतने पर भी ना समजे तो सैनिक धर्म बता देना

 

राकेश कुमार मस्ताना भद्रवाही

            डोडा,जम्मू ,कश्मीर

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