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प्रेम रास-अंजू तंवर

वृंदावन की गलियों में रास,
रचाती राधा रानी,
दौड़े-दौड़े पीछे दौड़े
राधा प्यारे कृष्ण मुरारी
प्रेमरूपी रास में गूंजी,
बंसी की मधुर वाणी
प्रेम राग में रंग गए देखो!
मोहक राधा रानी,
पंख फैलाकर नाच रहे
चारो ओर मयूर,
प्रेम का रोग ऐसा लागा
दीवानी हुई मीरा रानी
छूटा ना रोग कृष्ण का
ढह गया उसका सर्वेश
विष पिलाया अमृत के जैसा
घूट घूट पी गई मतवाली
श्याम रंग की ओढ़ी चुनरी
जीत गई वो दुनिया सारी
प्रेम का रंग है ऐसा
लग जाए ना छूटे किसी से
तन मन धन से लूट जाए बावरे
फिर क्या! फिकर दुनियादारी की
प्रेम हो राधा मीरा जैसा
निस्वार्थ, ना अहंकारी
एक बार भक्ति में लिपटे
लीन हो गई दुनिया सारी।।

Anjukanwar

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Anju kanwar

Anju kanwar

Heart touching poetry 💕 Unique thoughts💕

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