प्रेम रस से भरी “होली” – सचिन ओम गुप्ता

प्रेम रस से भरी “होली” – सचिन ओम गुप्ता

मैंने उसको देखा, उसने मुझको देखा
और इस देखा-देखी में वो मेरी हो-ली,
आज देखते ही देखते आ गया रंगों का त्यौहार
आओ चलो मिलकर खेले होली |

भरी पिचकारी रंगों से, तन उसका भीगा दिया
रंगों के इस त्यौहार में, अपने प्रेम का रंग बरसा दिया |
मत भाग गोरी इन से दूर, जाग उठे हैं भाग आज गुलाल के
लेने दे आज इन्हें प्रीत का चुम्बन, गोरी तेरे गाल के |

गोरी प्रेम के इस मधुर पथ पर पग बढ़ने दे आज,
नयी उमंग के साथ संग बढ़ते हैं आज |

रंग गुलाल लगाए एक दूजे को
करे प्रेम रस की बौछार
जाति मजहब सब भूले आज
बड़ो का करे आदर, छोटो को दे प्यार,
मुबारक हो आप सभी को होली का त्यौहार |

sachin om guptaसचिन ओम गुप्ता, चित्रकूट धाम
उत्तर प्रदेश

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