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प्रिये जो मिले तुम सहारा बहुत है-सुनील-दुबे

भंवर में मिला जो किनारा बहुत है।
मिले दिल से दिल हमारा, बहुत है।
फिकर ही नहीं जहां को जहां की,
सखे प्रेम दिल में बहारा बहुत है।
आखों में उल्फ़त हैं देखें तुम्हारी,
प्रिये जो मिले तुम सहारा बहुत है।

किसी नज़र की न चाहत हमें है,
तुझे देख पायी नजारा बहुत है।
पुकारो कभी तो मै चल पडूँ बस,
तेरे साथ का ही इशारा बहुत है।
खुद को संवारा देखकर आईने में,
प्रिये जो मिले तुम सहारा बहुत है।

खूबसूरत है रात चाँदनी की कमी है,
नहीं चांद निकला, सितारा बहुत है।
न आशा न चाहत न उम्मीद कोई,
मगर तेरी सूरत निहारा बहुत है।
खुशियाँ हो चारों तरफ इस जहां में,
प्रिये जो मिले तुम सहारा बहुत है।

      ✍ सुनील दुबे 
        जौनपुर (उ.प्र.)

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