रास्ते की मंजिल-दिव्यनी पाठक

रास्ते की मंजिल-दिव्यनी पाठक

मेरी राह का ये कैसा मोड़ हैं।
नजर आता नही मंजिल का जोड़ हैं।
लक्ष्य ही जीवन का भौर हैं।
आपदाऐ भी मुझ पर घौर हैं।

 

Divyani Pathak   दिव्यानि पाठक

  सेहोर,माधियप्रदेश

0

Leave a Reply

Create Account



Log In Your Account