Raksha Bandhan… Poem By Sachin A. Pandey

रक्षाबंधन

बहन-भाई की प्रीति है,
यह चली आ रही रीति है;
है अनुरागा यों सलोना बंधन,
लो पधारा पर्व ‘रक्षाबंधन’।

त्योहार यह ठहरा प्रतीक-ए-अमन,
पवित्र ‘श्रावण’ माह होता आगमन;
सर्वत्र परस्पर तिलक-चंदन,
जिसे दर्शाए ‘रक्षाबंधन’।

डोर यों तो कच्चे धागे का,
सुरक्षा-चिह्न आयुष्यभर का;
विनोदमय हुए सभी के मन,
आया खुशनुमा ‘रक्षाबंधन’।

इस रिश्ते का इतना मान,
खींच लाए यमलोक से प्राण;
नाता है नाजूक कलियों-सा ,
जिसे खिलाए ‘रक्षाबंधन’।

एक उदाहरण गोविंद-द्रोपदी,
जिनकी मिसाल रही सदियों-सदी;
बहन करे भाई का वंदन,
एकत्र मनाएँ ‘रक्षाबंधन’।
– सचिन अ. पाण्डेय

Sachin Pandey

मैं सचिन पांडेय मुंबई महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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