Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

Raksha Bandhan… Poem By Sachin A. Pandey

रक्षाबंधन

बहन-भाई की प्रीति है,
यह चली आ रही रीति है;
है अनुरागा यों सलोना बंधन,
लो पधारा पर्व ‘रक्षाबंधन’।

त्योहार यह ठहरा प्रतीक-ए-अमन,
पवित्र ‘श्रावण’ माह होता आगमन;
सर्वत्र परस्पर तिलक-चंदन,
जिसे दर्शाए ‘रक्षाबंधन’।

डोर यों तो कच्चे धागे का,
सुरक्षा-चिह्न आयुष्यभर का;
विनोदमय हुए सभी के मन,
आया खुशनुमा ‘रक्षाबंधन’।

इस रिश्ते का इतना मान,
खींच लाए यमलोक से प्राण;
नाता है नाजूक कलियों-सा ,
जिसे खिलाए ‘रक्षाबंधन’।

एक उदाहरण गोविंद-द्रोपदी,
जिनकी मिसाल रही सदियों-सदी;
बहन करे भाई का वंदन,
एकत्र मनाएँ ‘रक्षाबंधन’।
– सचिन अ. पाण्डेय

108 views

Share on

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on email
Email
Share on print
Print
Share on skype
Skype
Sachin Pandey

Sachin Pandey

मैं सचिन पांडेय मुंबई महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

3 thoughts on “Raksha Bandhan… Poem By Sachin A. Pandey”

  1. 583712 203221Currently truly do not stop eating because there is yet the decision which you will transform into. Work from your home us rrs often a fad for that who wants to earn funds but still enough time requires most substantial occasions employing children and kids goes for as the modern habit. attract abundance 631686

  2. 99666 336776I discovered your internet site website online and check numerous of your early posts. Keep on the top notch operate. I just now additional your Feed to my MSN News Reader. Looking for forward to reading a lot far more from you discovering out later on! 747251

Leave a Reply

जागो और अपने आप को पहचानो-प्रिंस स्प्तिवारी

मैंने सुना है कि एक आदमी ने एक बहुत सुंदर बगीचा लगाया। लेकिन एक अड़चन शुरू हो गई। कोई रात में आकर बगीचे के वृक्ष

Read More »

Join Us on WhatsApp