रो रही गंगा माँ – अमित काब्यान

रो रही गंगा माँ – अमित काब्यान

हो गयी बिलुप्त सारी नदिया ।।।।।।
गंगा भी उस कगार पे आ खड़ी ।।।।
डाल देते है नले की सारी गन्दगी गंगा मे।
इससे लोगो को किया है परी।।।।।।।।।।।॥
होगयी बिलुप्त सारी नदिया ।
नदिया गंगा भी उस कगार पे आ खडी ।।।।।।।।।।।।।।
भग्यरथी के प्रयास से आसमाँ से उत्तर मे सारे पापयो के पाप धोने ।।।
आज इसी के अत्यचर से।मुझे पर रहा है रोने।।।।।।।।।।।।।
जहा जह मे गयी वदेश हरि भरि हो गयी ।।।।
मेरे कारण कोई भूखे नही मरि ।।।।।
ढाल देते है ।नले गंदगी गंगा मे।।।।।
इससे लोगो को किया है परी।।।।।।।।।।
हो गयी बिलुप्त सारी नदिया गंगा भी उस कगार पे आ खड़ी।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
वर्षो से अत्याचार सह रही हूँ।।।
अब हिम्मत छोर रही ।।।…
अब मुझे बचाने को किसी को नही परी।।।।।।
हो गयी बिलुप्त सारी नदिया गंगा भी उस कगार पर आ खड़ी ।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।

अमित काब्यान

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