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रुक गये कदम मेरे – नेहा श्रीवास्तव

मैने क्या हँसना छोड़ दिया,
तारों ने चमकना छोड़ दिया.
छायी चेहरे पर उदासी,
कलियों ने खिलना छोड़ दिया.
मौन हो गयी मै ,
चिड़ियों ने चहकना छोड़ दिया.
रुक गये कदम मेरे ,
हवाओं ने चलना छोड़ दिया.
आँखे बन्द हो रही थी मेरी सूर्य भी हो रहा था अस्त,
जब अन्त समय मेरा आया बादल ने बरसना छोड़ दिया.

Neha srivastavaनेहा श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश (बलिया)

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Neha Srivastava

Neha Srivastava

मैं नेहा श्रीवास्तव बलिया उत्तरप्रदेश की निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस की कवित्री हूँ। मैंने B.ED Science में शैक्षणिक योग्यता प्राप्त की है। मैंने साहित्य लाइव रंगमंच 2018 (राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी प्रतियोगिता) में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है।

5 thoughts on “रुक गये कदम मेरे – नेहा श्रीवास्तव”

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