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“सच्ची श्रद्धांजलि” – अशोक सिंह

हे अमर देश के ज्योतिपुंज
हे बलिदानी करुणावतार
हे राष्ट्रविंब भारत दर्पण
हे भगत बन्धु तुमको प्रणाम ।।

ये देश की अपनी गरिमा है
जो कण-कण में फैला प्रकाश
कुछ राष्ट्र प्रेम में त्याग कियें
फ़ासी तक को हो गये तैयार ।

वो माता थी एक पूज्य बिम्ब
जिसने इस वीर को जन्म दिया
भारत माता के खातिर जो
हर पल हर क्षण सत्कर्म किया ।।

आर्यावर्त में थी विपदा
अंग्रेजों ने अधिकार किया
कुछ ही विरोध कर पाये थे
बाकी ने गुलामी मान लिया ।।

इन चन्द धरा के सपूतों में
भगत,बोश आजाद हुए
सुखदेव गुरू भी अड़े रहें
भारत माँ को फरियाद हुएं ।।

इन वीर पुरुष के वीर कर्म
“अलक” दिल में रोज सजातें हैं
जो देश हेतु बलिदान हुएं
उनको हम शीश नवातें हैं ।।

Ashok Singhअशोक सिंह आजमगढ़
उत्तरप्रदेश

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Ashok Singh

Ashok Singh

मैं अशोक सिंह गोरखपुर उत्तरप्रदेश का निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस का कवि हूँ।

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