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सफर जारी रखो-मुकेश सिंह राठौर

नौका हो मझधार में, चाहे दूर किनारा हो
मत होना भयभीत, सफर जारी रखो ।।

चिलचिलाती धूप हो, या हो कड़कती ठंड
सर पे पगड़ी बांध, सफर जारी रखो।।

कुछ डरायेंगे तुम्हे, कुछ भटकायेंगे
डटे रहना तुम, सफर जारी रखो।।

लक्ष्य को करके ध्यान, तुम चलते रहो
मंज़िल नहीं है दूर, सफर जारी रखो।।

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