Sahity Live ने मुझे बेफिक्र कर दिया – नेहा श्रीवास्तव

Sahity Live ने मुझे बेफिक्र कर दिया – नेहा श्रीवास्तव

बात उन दिनो की थी जब मै खामोश बैठी थी,
और मेरे शब्द बिखरे पड़े थे
उन्हे उनकी मंजिल चाहिये थी
शिकायत थी उन्हे मुझसे शायद
पर सहसा एक दिन साहित्य लाइव एक हवा के झोंके की तरह आया
और उन्हे समेटता हुआ अपने साथ ले गया
मै भी साथ हो ली.
अपने शब्द रूपी पूंजी को एक एक भरोसे भरे हाथों मे सौंप कर मुझे एक सुखद अनुभव हुआ.
Sahity Live ने मुझे बेफिक्र सा कर दिया है मेरे शब्दों को नया मुकाम देकर

Neha Srivastavaनेहा श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश (बलिया)

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