सैनिक-पौरुष आदित्य

सैनिक-पौरुष आदित्य

नींद मेरी उड़ जाती हैं, जब बॉर्डर पर मरने की खबर आती हैं
जब शव उसका आता हैं,पूरा गांव मातम मनाता हैं
पर क्या होता है कुछ समय बाद वो कभी ना याद आता हैं
जब याद ना रहे वो पल भर , क्या साथ दोगे तुम उम्रभर
पत्नी रोयेगी हर पल,याद करेगी बिता कल
बेटी उनके आने पर कैसे पाप पापा करती थी,
अपनी नई सीखी कविता सुनाया करती थी
उसकी कविता सुनकर वो भी इठलाया करते थे
बेटी की होशियारी पर सीना फुलाया करते थे
दो देशों की लड़ाई में वो अपना पिता खो बैठी
हँसते खेलते बचपन को एक पल में ही गवा बैठी
नमन हैं ऐसे वीर को, जो देश के लिए
छोड गए अपने हीर को
ये हि है भारत माँ के वीर सपूत
नही चाहिए कोई सबूत

 

          पौरुष आदित्य

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