समस्या कश्मीर का-पुष्कर कुमार

समस्या कश्मीर का-पुष्कर कुमार

हम सभी जानते है कि हमारे देश भारत में, कुल 29 राज्य और 7 केंद्र शासित राज्य है । लेकिन इन सभी राज्यो में जितना जम्मू और कश्मीर में,आतंकवाद,पत्थरवाजी और भर्ष्टाचार्य आदि समस्या से ग्रसित है।उतना कोई अन्य राज्य नहीं, और यह कोई नविन समस्या नही बल्की आजादी के समय से हीं एक समस्या का विषय बना हुआ है ।जिसका एक कारण नही बल्की अनेकों कारण है जिसके लिए सदियों से समाधान के लिए विभिन्न राजनीतिक पार्टी और वुद्धिजिवी वर्ग प्रयास करते आए है,लेकिन समाधान अभी तक नही हो पाया है।
अंग्रेजो जब भारत छोड़ा तो भारत को दो भागो में विभाजित कर दिया- भारत और पाकिस्तान उस समय कश्मीर एक स्वतंत्र राज्य था, वहा के शासक महाराज हरि सिंह थे,जो अपने राज्य को स्वतंत्र रखना चाहते है।लेकिन वहाँ के आम नागरिक और स्थानीय नेतागण भारत में विलय के पक्ष में थे,जो कि पाकिस्तान को मंजुर नही था । क्योकि वहाँ मुस्लिम आवादी अधिक थी। इसको देखते हुए पाकिस्तान ने कबाइली और अपनी कुछ सेना के साथ 1947-48 में कश्मीर पर आक्रमन कर दिया ,और कुछ हिस्सा पर अधिकार भी प्राप्त कर लिया उस समय भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के मोहम्मद अली जिन्हा, जनमत संग्रह के आधार पर कश्मीर की समस्या को हल करना चाहते थे।और उन्होंने, स्तंत्र रूप से भारत या पाकिस्तान में कश्मीर का विलय करने की बात कही थी। पर जिन्हा ने उसे ठुकरा दिया । क्योकि उसे अपने सेना पर भरोसा था । जब यह मुद्दा हल नही हुआ तो इसे, संयुक्त राष्ट्र के समक्ष रखा गया,लेकिन अभी तक कश्मीर मुद्दा नही सुलझ पाया । और कश्मीर एक राजनीतिक मुद्दा बनकर रह गया ,इधर भारत सरकार भी अपने कब्जे वाला भाग को महाराज हरि सिंह के शर्त के अनुसार भारत के संविधान में अनुच्छेद – 370 के तहत विशेष अधिकार देते हुए भारत में विलय कर लिया गया । विशेष अधिकार इस प्रकार है : –
1) सांसद द्वारा बनये गये कानून जैसे-रक्षा, विदेश और संचार को छोरकर ,लागु करने के लिए जम्मु-कश्मीर के विधान सभा की अनुमति लेना होगा।
2) अनुच्छेद -357 वहां लागु नहीं होगा ,इस कारण वहा के संविधान को राष्ट्रपति भंग नही कर सकता ।
3) 1976 का शहरी भुमि कानुन जम्मुु-कश्मीर में लागु नही हो सकता,इसके तहत वहाँ के नागरिक किसी अन्य राज्य में जमीन खरीद सकती है लेकिन दुसरे राज्य के लोग जम्मु-कश्मीर मे जमीन नही खरीद सकते हैं।
4) अनुच्छेद- 360 जम्मु-कश्मीर पर लागु नही हो सकता,जो वित्त से संबधित है ।
5) जम्मु कश्मीर के नागरीको को दोहरी नागरीकता दिया गया है ।
6)जम्मु-कश्मीर भारत का एकमात्र राज्य है, जहाँ के नागरीको को अपना ध्वज फहराने का अधिकार प्राप्त है। अर्थात भारत का राष्ट्र-ध्वज तथा राष्ट्र-प्रतिकों का अपराध करना कश्मीर मे अपमान नही माना जाता है।
7) जम्मु-कश्मीर का विधान सभा का कार्यकाल 6 वर्ष का है, जबकि अन्य राज्यो का 5 वर्ष का है।
8) भारत के संसद द्वारा बनाया गया कानुन सिमित क्षेत्र में लागु होगा और उच्चतम न्यायालय के आदेश भी मान्य नही होगा ।
9) जम्मु-कश्मीर के कोई महिला अगर भारत के किसी राज्य के पुरूष से विवाह करती है,तो जम्मु – कश्मीर की सदस्यता समाप्त हो जाएगा,लेकिन किसी पाकिस्तान के पुरूस से विवाह करता है तो उस महिला के साथ-साथ पुरूष को भी वहाँ की नागरीकता प्राप्त हो जाएगा ।
10) जम्मु कश्मीर के महिला पर शरियत कानुन लागु है ।
11) जम्मु कश्मीर मे पंचायत को अधिकार प्राप्त नही है।
12) अनुच्छेद – 370 की वजह से RTI वहाँ लागु नही हो सकता ।
13) जम्मु कश्मीर में अल्पसंख्यकों (हिन्दु-सिख ) जो कि 16% है उसे आरक्षण नही मिलता है ।
उस समय उपर्युक्त अधिकार देने के पिछे जो भी परिस्थिति हो लेकिन वर्तमान समय में इसमें सुधार की जरूरत है ।जितने भी राजनीतिक पार्टी है ,इस पर सब राजनीतिक ही करती है, और सत्ता पाने का जरिया समझती है । क्योकि एक राज्य को इतना सारा अधिकार देकर एक तरह से दुसरे राज्य और देश के साथ अपमान है ।क्योकि हमारा राष्ट्र ध्वज को अपमान करने का उन्हे अधिकार है और हम कुछ नही कर सकते,सांसद कानून भी अन्य राज्य की अपेक्षा वहाँ सीमित क्षेत्र में बना सकती है। ,जम्मु-कश्मीर के निवासी किसी अन्य राज्य मे जमीन खरीद सकता पर अन्य राज्य का कोई भी व्यक्ति वहाँ जमीन नही खरीद सकता हैै, इससे अन्य राज्य के व्यक्ति मे हीनता की भावना जागृत होती है। सबसे बड़ा कारण यह है कि जम्मु- कश्मीर का कोई स्त्री अगर किसी अन्य राज्य के पुरूष से विवाह करता है तो उनकी वहाँ की नागरीकता समाप्त हो जाएगा,लेकिन किसी पाकिस्तान के नागरीक से करता है, तो उसे जम्मु-कश्मीर की भी नागरीकता प्राप्त हो जाएगा,इस बात से पता चलता है जम्मु-कश्मीर मे भारतीय से ज्यादा पाकिस्तान का ही व्यक्ती है,लेकिन हम उन्हे यहाँ की नागरीकता देकर भारतीय बना लेते इस तरह जम्मु-कश्मीर मे कुछ ना-समझ भारत से हमदर्दी कम और पाकिस्तान से ज्यादा रखते है । एसे में वहाँ आतंकवाद , पथर – वाजी और देश द्रोह जैसे नारा लगाते रहते है,और वह पाकिस्तान मे विलय हेतु प्रयत्न करते रहते है। तथा हमारे देश के कुछ नेता वोट की खातिर बढ़ावा भी देते है ,उन्हे यह सब से क्या लेना देना उन्हे तो सिर्फ सत्ता चाहए ।
जम्मु- कश्मीर मे अनुच्छेद – 370 को समाप्त कर समान्य राज्य की श्रेणी में लाया जाय तो अन्य सभी राज्य की तरह वहाँ भी शांत और समान्य हो जायेगा और पाकिस्तान को भी भारत मे आतंकवाद को बढ़ावा देने का स्रोत ही समाप्त हो जाएगा ।कभी-कभी पाकिस्तान,भारत के साथ छंदम युद्ध करता है, तो इस स्थति मे हमारी सेना पर बिना किसी राजनीतिक दबाव का भारत सरकार के द्वारा पुरी तरह से छुट दे देना चाहिये,ताकि आंतकवाद कही अपना मुँह न दिखा सके

 

Pushkar Kumar  पुष्कर कुमार

अररिअ , बिहार 

 

 

 

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