सन 90-बबीता खंडूरी

सन 90-बबीता खंडूरी

छज्जों छज्जों की मोहब्बत सुहानी लगती है
जब वो आती है गीले बाल सुखाने बहुत लुभानी लगती है,
उनका वो पैर ऊच्काकर तार पे चुनर को डालना
गीले केशों को टावल से झटकाकर हवा में लहराना ,
खुशबू फिजाओं में उनके हमाम की लगती है मोहल्ले की हर किवाड़ को सूझ जाए उस पल शरारत ,
वो छत पर कुछ उस अंदाज से चलती है
छज्जों छज्जों में मोहब्बत यहाँ रोज पनपती है,

सामने के घर में मेरी वाली
तो बगल के छज्जे पे मेरे भाई की दिखती है ,
पतंगों के बहाने छतों पे रोज जाना
ये नजाकतौन की महोब्बत
ये इशारों का जमाना,
मेरी पतंग की डोर
उनकी छत की तार पे अटकी हे
बात करने का मिल गया बहाना
पर बगल में आँटी हे
छज्जों छज्जों में मोहब्बत
यहाँ रोज पनपती है,

कल फिर से कोशिश करूँगा
कन्नी माँगने के बहाने
उनसे बात करूँगा ,
सारी दिल की बात तो बस
बात पे अटकी हे
मेरी एक तरफा मोहब्बत
मझधार में भटकी हे,
सखियों सँग वो जब-जब
बाजार निकलती है
मेरे दिल में मिलने की
उम्मीद सी जगती है ,
मेरी आरजू पे पानी
उसकी दोस्त ने फेरा है
बिन जाने मुख मोड़के कहती
ये बहुत छिछोरा है,

अब उनके घर में जाने के
बहाने करता हूँ
उनके पापा की बेमतलब ही
आओ भगत भी करता हूँ ,
खुद के घर से ज्यादा काम
उनके परिवार के करता हूँ
देख ना ले बस मेरी माँ
इस बात से डरता हूं ,
मुमकिन था जो जो करना
वो सब करके देख लिया
एक बात करने के खातिर
मैं कोशिश जी जान से करता हूँ
भाई उसका बड़ा खूंखार
बस अपने साले से डरता हूँ ,

मुनासिब है अब बोल भी दूँ
राजे जिगर खोल भी दूँ
नामुमकिन है उनके घर में बात
सोचा मैंने ये सारी रात ,
अब फिर से छज्जों की
उम्मीद अटका हूँ
वो आकर खड़ी है छज्जे पे
सोचा कुछ बोल भी देता हूँ ,
जोर से बोलूँगा तो
मोहल्ले में कोहराम हो जाएगा
एक और आशिक आशिकी मेँ
बदनाम कहलायेगा,
एक अच्छी सी तरकीब
मेरे जहन में आई है
पत्थर में खत फेंक दूँ
इसमें ही मेरी भलाई है ,
इज़हारे दिल में करता
इतने में एक पत्थर
मेरी ओर ही आ गया
खत मेहरूम मोहब्बत का
महबूब की ओर से आ गया ,
इजहार-ए-इश्क था उसमें
मेरे महबूब के हाल का
मेरा दिल कुछ उस पल
सीने से बाहर था आ गया
फिजाओं में एहसास मोहब्बत
जर्रे जर्रे में छा गया,

दोनों के नैनों में
अब इश्के सागर था छलक रहा
छज्जों छज्जों का प्यार यहाँ
परवान को था अब चढ़ रहा ,
ऐसी मोहब्बतों के किस्से
गलियों में बसा करते हें
छज्जों छज्जों के प्यार यहाँ
सन 90 में हुआ करते हें ।

 

 

           बबीता खंडूरी

Babita Khanduri

मैं बबीता खंडूरी फरीदाबाद हरियाणा की निवासी हूँ। मैं श्रृंगार रस की कवित्री हूँ।

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comments
  • Wah kya bat h bhut hi umda

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