संवर जाए-आरती प्रकाश दौर

संवर जाए-आरती प्रकाश दौर

जब कोई याद छेड़ जाए , तब ये मन बेचैन हो जाए
ना समझ हमें ये आए.. के कैसे दिल को समझाए
बस यंही सोचते हे हम, ये यादो के साये गुजर जाये
ना याद उन्हें कुछ आए , ना याद हमे कुछ आए.
जो कारवा गुजर गया , बस धीरे धीरे संवर जाए
ना हमे थी खबर, ना उन्हें थी खबर
क्या दोष नसीब को दे , ये थी मंजिल की डगर
जो हमने था तोडा , ना उन्होंने कभी जोड़ा
बस चलता रहा ये सफ़र .. जो हम दोनों ने था छोड़ा
अब तो बस यंही दुआ हे के ये मंजिल सवर जाए
ना कसूर उनका था , ना कसूर हमारा था
के जानकर भी सब ये दिल अंजानसा था
जो लकीरे थी हमने नसीब से चुराई , उन्होंने कभी ना वो सजाई
बस जलता रहा हे मन …..जो हमने था जलाया
अब तो बस यंही आस हे के ये जिंदगी सवर जाए

 

    आरती प्रकाश दौर
     पनवेल,मुंबई

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