Notification

अपने लेख प्रकाशित करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

संयम-संतोष कुमार कोली

बैसाखी का सहारा लेकर,चलना भी क्या चलना है?
घुन लग रहा जिस चने में, वह चना भी क्या चना है?
पतझड़ फैला जिस कानन में,वह घना भी क्या घना है?
कीड़ा लग रहा जिस तने में, वह तना भी क्या तना है?
जो इनसे पार पा ले,उसका क्या कहना।
संयम जीवन का, बेशकी़मती गहना।
टूटने लगे, जब जीवन में संयम का बाॅऺध।
ईश ध्यान की ईंट लगाओ,लेप, ओम् नाम की नाद।
पवित्र नाम से इस बाॅऺध में, लग जाएंगे चार चाॅऺद।
इस लेप से सुदृढ़ होगी,बाॅऺध की फिर से बुनियाद।
होगा बाॅऺध में, संयम सलिल का बहना।
संयम जीवन का, बेशकी़मती गहना।
जिसको तुमने अपना लिया, उसको तुम सकते हो छोड़।
दृढ़ इच्छा शक्ति जगाओ, कुछ ही दिनों की है यह दौड़।
समूह में रहना सीखो, जीवन ढंग को नया दो मोड़।
धीरे- धीरे झड़ जाएगा,सुंदर जीवन का यह कोढ़।
सीखो, हितकारी बदलाव को सहना।
संयम जीवन का, बेशकी़मती गहना।

41 views

Share on

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on linkedin
LinkedIn
Share on email
Email
Share on print
Print
Share on skype
Skype

Leave a Reply

Join Us on WhatsApp