सपना-कविता यादव

सपना-कविता यादव

डूबती हुई नाव को किनारा मिल गया ….

आप ने हाथ बड़ाया तो सहारा मिल गया ….

आज कल की भागमभाग से जीवन में …

कोई नहीं रुकता आप के लिए….

जिसने वक्त निकाला उसकी बात ही निराली है …

देखिये गौर से वो इंसान के नाम पर वो रब तो नहीं है…

या रव के नाम पर आप का साहिल तो नहीं है …

जिसको उसने भेजा आप का सहारा बना कर …

में सोच कुछ ऐसा ही रही थी पर …

पर आँख खुली तो ये एक सपना था और …

फिर वापस मुझे अपने काम में लगना था ..

 

कविता यादव

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