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सरकार और इंतज़ार-देवेंद्र अवस्थी

होते हुए साथ मे भी वो
ना जाने क्यूँ गुम सा रहता है,
इक ऐसा शख्स तलाश में जिसकी
हर कोई उम्र भर प्रतीक्षारत रहता है,
ऐसा लगता है अब मुझको
हम है अभी अधूरे से रहते,
उस इक शख्स के बिना जिसे
इश्क़ मे ना जाने क्या-क्या कहते,
कुछ लोग उसे जिन्दगी बोले
और कुछ उसको जान बुलाते,
पर मेरी दिल पर जो राज करे
हम तो हैं उसको सरकार बुलाते

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