सावन की बारिश-राकेश कुमार

सावन की बारिश-राकेश कुमार

बरसे बदरिया सावन की,
सावन की-मन भावन की,
नाचे चारो और मोर मचाए शोर,
सब मस्ती म गाओ,सावन का आनंद पाओ,
उमड़ घुमड़ काला गगन गहराए, मनवा भी घबराए, आए जाए खेल खिलाए,
मस्ती म हर मन,बरसे बदरिया सावन की,सावन की
मन भावन की,
लड़कियों का ह मन,झूला झूले हम,
है सावन की ऋतु हमारी,
बरसे बदरिया सावन की,मन भावन की।

 

  Rakesh Kumar Mastanaराकेश कुमार

मुथरा ,उत्तर परदेश

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