संवत्सरी-दीशा शाह

संवत्सरी-दीशा शाह

संवत्सरी पर्युषण का
आखरी दिवस है
३६५ दिन में जाने
अनजाने में कोई भी भूल
, हुई हो कभी किसी
से बोलचारी हुई हो
किसी का दिल दुखाया हो
स्वार्थ मोह , कोई भी
गलती की हो जाने
अनजाने में सबंध में
आंच हुई हो
ये अवसर मिलता है
गलती सुधारने को
और सबंध को सुधारने को
मिच्छामि दुक्डम

 

      Disha Shah दीशा शाह

कोलकाता, पश्चिम बंगाल

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