शहीद भगत सिंह-सचिन आनंद

शहीद भगत सिंह-सचिन आनंद

छोड़ के माँ की ममता छोड़ के घर की चूल्हि…
खेली थी खून की होली…
23 साल की उम्र में चुमी थी जिसने सूली..
जिसने क्या दुश्मनो को बर्बाद…
उसका जिगरा था फौलाद…
नमन है उस माता को जिसने जना ऐसा औलाद…
उनके आँखों में न डर था निडर थे वो जवान…
कफ़न बांध के आजादी का दिया था पैगाम…
दुश्मनो से भीड़ गए न सोचा एक बार..
क्योकि देश था पहले और वतन से था प्यार…
बिचित्र थे वे लोग वे थे देश की शान…
वे होते न अगर देश होता न महान्…
तुम छोड़ ये बात मिलालो सब हाँथ…
नेता मंत्री संत्री की क्यों सुनते हो तुम बात…
अगर हिन्दू मुस्लिम एक न होते तो गुलामी में डूबा होता ये रात….
आओ लेते एक प्राण हम शाम न होने देंगे…
सहीदो की क़ुरबानी को बदनाम न होने देंगे…
मेरा जिगरा है फौलाद इसमें जलता है आग…
जबतक है लहू जहेन् तिरंगे में न लगने देंगे दाग…

 

सचिन आनंद

Ravikant Agarwal

मैं रविकांत अग्रवाल पुणे महाराष्ट्र का निवासी हूँ। मैं वीर रस और श्रृंगार रस का कवी हूँ। मैं साहित्य लाइव में मुख्य संपादक तथा दिशा-लाइव ग्रुप मे प्रेस प्रवक्ता के रूप में काम कर रहा हूँ।

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