शायरी-आनंद मिलन

शायरी-आनंद मिलन

चेहरा छुपाये दूपटा से, मुँह मोड़कर जाया ना करो। साथ तो चले है कुछ देर, फिर अजनबी बनाया ना करो। ये आँखों का खामोशी समझ, जज्वात से तुम खेलाया ना करो। मुझे अपनी होंठों से लगा लो, गैर बना के ठुकराया ना करो। हूशन ने लूटा है दिवानो को, रिवाज तोड़कर जाया ना करो। मैं
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शायरी-नुजत राणा रुही

संनाटों के पलों में कोई चुपके से झाँक जाता है । गरद से जमें धूलों को अपने अँगुठे से पोछ जाता है । गुदगुदाता सा अपने होने का एहसास जगाता है । एक धुन इन लबों के हर सय पर बिखेर जाता है । 2 तेरा ख्याल तो सामिल हर एक आह में है ।
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दिल के रिश्ते-जोगेंद्र कुमार गुप्ता

दिल के रिश्ते जनम लेते से बनते है, ये है दिल के रिश्ते! दिल के रिश्ते दोस्ती से बनते है, ये है दिल के रिश्ते! दिल के रिश्ते साथ निभाने से बनते है, ये है दिल रिश्ते !         जोगेंद्र कुमार गुप्ता    नीलबड़, भोपाल 3+

शायरी- शोभा सृष्टि

उम्मीद की एक लौ मेरे अन्दर जलती है। सपने देखते हुए कभी ना मेरी आँखे थकती है। कोशिश और कशिश कायम है अभी तक। क्योकि कामयाबी की किताब सच्ची कोशिश रचती है।   शोभा सृष्टि  राजस्थान 1+

शायरी-अपना घरवाल

यूहि हम तुझे अपना मानते रहे तु निकली बेवफा हम देखते रह गये आता है वो दिन याद आज भी मुझे जिस दिन मिले थे आप हमें काश वो दिन आता फिर लौट के तेरी इस बैवाफाई से पहले हि किसी और को अपना हमसफर बना लेते   अपना घरवाल  उत्तराखंड 0

शायरी-अनिल नेगी

छौटी सी जिंदगी है युुुहि आगे बढते चले जाएंगे प्यार की राहों मैं यूही आगे निकलते जाएंगे तू यूहि मेरा साथ निभाते रहना जिस दिन छूटा तेरा साथ ताै हम तिनके की तरह बिखर जाएंगे   अनिल नेगी उत्तराखंड, देहरादून  4+

गाना-ओमकांति

कुछ वक्त तो दो हमको जरा, तेरा दर्द छुपा लेंगे। दिल कम धड़कता है, दर्द कब सम्हलता है, नाव सी चलती है इन आंखो मे, कभी तैरते है कभी डूबते है। कुछ वक्त। समा अश्को से जलता है, हवा भी पैदल चलता, इस दिल मे दर्द के कई टुकड़े है, कभी जुडते कभी बिखरते है।
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शायरी-शोभा सृष्टि

शब्दरूपी मोतियों की माला पिरोया करती हू आनन्दरूपी बारिश मे खुद को भिगोया करती हूँ जब आती है बात कोई दिल मे मेरे। तब अपनी कलम को स्याही मे डुबोया करती हूँ   शोभा सृष्टि  राजस्थान 2+

जखम उसने दिया-ओमकांति

इतना जखम उसने दिया है जीना अच्छा लगता नही । सच्चाई सामने है मुझे कोई सच्चा लगता नही । हमको पता है मर जायेंगे एक दिन उनके हाथों से, जाने क्यो हम पीते है उनके जजबातो से। सच्चाई । एक पल चैन मिला नही हमको उनके संग मे, दम घुटता है अपनी झूठी उम्मीदो से।
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शायरी-ओमकांति

रोकर हमने तुम्हे इसलिए देखा था, क्योंकि ए आंखे कुछ कहना चाहती थी। पर अबतो ए पलके भी परदा सी हो गई है , जो सारे अश्क छुपाए बैठी है।       ओमकांति 0

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