शायरी-इजहार खांन पठान

शायरी-इजहार खांन पठान

गर खुद पे भरोसा न हो , तो हुश्न का दीदार न करना , तुम प्यार तो करना मगर इजहार न करना ! चाहे मशरूफ रहना तुम सदा महबूब के खातिर , मगर मां-बाप की नाफरमानी कभी मेरे यार न करना ! इस दौर के आशिकों से है इजहार मेरी ये गुजारिश , प्यार में
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शेड शायरी -कृष्णा कोली

मिलना हो तो मिलना , ना मिलना हो तो ना सही । खानापूर्ति करने से अच्छा, कोरा कागज ही सही।। प्यारा सा गुस्सा , प्यारी सी मुस्कान । झूठे कसमे फर्जी बादे , दिखाये सपने कमाल ।। लाख चाहो इनसे बचना , माया का ये हैं जाल । कैसे बचे इन्शान इनसे, मन मे हैं
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शायरी-ओमकांति

काश कि हम तुम्हे भूल जाते , तो खुशियो का रंग हमपे भी चढता । काश कुछ लोग मेरे सहारे न जीते, तो घुटन भरी जिंदगी न जीते साहब। ऐ खुदा मेरी आंशुओ पे रहम मत करना, क्योंकि अब वो किसी और के हो चुके है । ए तो दिल है जो सब जानते हुए
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लक्ष्य-फिरोज खान

अपनी मंज़िल को राहों की पहचान दे दूंगा, जूतों को अपने पैरो की पहचान दे दूंगा , अपने हाथो को लिखने की पहचान दे दूंगा और पहुचकर अपनी मंजिल पर, मै उन्हे उनकी मंज़िल की पहचान दे दूंगा             फिरोज खान        बंदायू,उत्तरप्रदेश 1+

शायरी-रोहित चौहान

मुझमें तू हैं! कि तुझमें में! हम में लव हैं! या लव में हम! दोसती से बढकर.हैं! हमारा रिशता! में तेरे गम में चूर हूँ! और तू अपने घमंड़ में चूर हैं!          रोहित चौहान भोपाल, मध्यप्रदेश 0

शायरी-ओमकांति

ना वो बेवफा थे न दुश्मन जमाना था , की बेवफाई है उसकी उमर ने , कितने बरस जब आए वो सामने , हम तो उन्हे पहचान न सके,        ओमकांति 0

शायरी-अजीत कुमार

हर खुशी को तेरी के लिए कुर्बान कर देंगे तुमने हमारी मोहब्बत को समझा नही है एक बार पलके उठा के देख तेरे लिए जमीन से आसमा भी पार कर देंगे जब देखा तुझे तो नजरो से दिल मे उतर गयी जब पाया तुझे तो मेरी जिन्दगी सवर गयी तेरे जाने के बाद जब भी
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शायरी -रोहित चौहान

बेवफा.सी.लग.रही.हैं! ये.जमीन! हमदरत.सा.लग.रहा.है.ये.आसमान! फिर.भी.में.अंजान.कयो.हूँ! जो.इन.दोनों.के.बीच.का.अंतर.नही.समझ.पा.रहा.हूँ! आैर.जमीन.आसमान.के.बीच.की.दुनिया.में.खीचा.चला.जा.रहा.हूँ!      रोहित चौहान  भोपाल, मध्यप्रदेश  1+

शायरी-मोहद इमरान

प्यार है हमे वतन से अहसास दिला के रहेंगे भले जान चली जाये हमारी देश की शान बचा के रहेंगे ! जय हिन्द जय भारत        मोहद इमरान शिवगढ़, उत्तरप्रदेश   0

महफिल- चेतन वर्मा

रेत पर नाम लिख कर नहीं मिटेगा ऐसी आस करता है , पानी का महल बनाकर पल-भर ठहर जाए ऐसी इकरार करता है , खुद होकर पागल बयानों से मुलाकात करता है , उसे कोई लेना-देना ही नहीं तुझसे ओर तु महफिल में रंगने की बात करता है |   चेतन वर्मा बूंदी राजस्थान 0

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