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बेरोजगारी, तुझे जाना ही पड़ेगा।

बेरोजगारी आज, हर जहां में पसरी है।
कहां गए वे युवा ,जिनसे आज भी यह उतनी ही डरती है।।

ढूंढ लाओ दोस्तो, उन युवाओं को कहीं से।
अब सत्ता तुम्हारे हाथ मै, पर जो चुप है वहीं सही है।।

मेहनत करने से तो,बुनियादें हिल जाती है।
तुम तो धरती हिला दो भाई,ताकि एक मामूली रोजगार मिल जाए।।

जैसे आसमां एक, तारे अनेक होते है।
उसी तरह प्रयास तुम्हारा एक,रास्ते अनेक होते है।।

बालक हूं अभी तो मै, ऐसा सोचना मत कदा।
दुनिया कहां और मै कहां, ये मंत्र याद रखना सदा।।

कवि: नीतेश शर्मा “अजूबा”

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