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मेहक अंसारी

दिल की हो तमन्ना तुम, ज़िंदगी की तुम ज़रूरत हो !
जिसको चाहा हर दिल ने प्यार की तुम वो सूरत हो !
तेरी तारीफ करूं जिससे वो लफ़्ज़ कहाँ से लाऊँ मैं
जिसके मुकाबिल नही कोई तुम तो ऐसी मूरत हो।।

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