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बदनसीब समाज-साजन

क्या कैद कर दूं मैं बेटियों को किसी घर में
क्या काट दूं उनके पंखों को जो उड़ रहीं हैं इन आसमा में
ए समाज तेरी दरिंदगी देख मैं मर क्यों नहीं जाता
मगर मरने से पहले सबको मार क्यों नहीं जाता

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