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इबादत-हरेंद्र सिंह

तेरी इबादत का एक पल गवारा नहीं जाता
तेरे बगैर एक पल ,अब हमसे सवारा नहीं जाता
न जाने क्या खुमार छाया है तेरे इश्क का
कि तेरी यादों का मंजर छोड़ कोई नजारा नहीं आता

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