गाना-ओमकांति

गाना-ओमकांति

कुछ वक्त तो दो हमको जरा, तेरा दर्द छुपा लेंगे।
दिल कम धड़कता है, दर्द कब सम्हलता है,
नाव सी चलती है इन आंखो मे, कभी तैरते है
कभी डूबते है। कुछ वक्त।
समा अश्को से जलता है,
हवा भी पैदल चलता,
इस दिल मे दर्द के कई टुकड़े है,
कभी जुडते कभी बिखरते है।
कुछ वक्त ।तेरे जाने से हम आग बने,
बिन पत्तो के बाग बने ।खामोशी के कई सदमे है ,
कभी चुभते है कभी डसते है ।कुछ वक्त ।

 

   

 

 ओमकांति

 

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