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मन-हर्षदा पचपोर

किसने सच ही कहा है कि
हमेशा दूसरों की सुनो लेकिन अपने मन की करो
जो भी इन्सान हमेशा
दूसरों की सुनता ओ हमेशा
गुलाम होता है
और इन्सान अपने मन की करता है ओ महान बनता है

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