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ना नींद है ना ख्वाब है-देवेंद्र अवस्थी

ना नींद है ना ख्वाब है अब
सिर्फ़ खामोशी बची हुयी है,

बहाकर ले गया सैलाब सबकुछ
फ़तक दिल में तन्हायी बची हुयी है,

हसरते राख हो गयी हैं लेकिन
आग अभी भी कही दबी हुयी है,

जिंदगी के सफ़र में उम्मीद की
बस एक चिंगारी बची हुयी है,

मै बुझा बुझा सा बैठा हूँ पर
हाथ में सिगरेट जली हुयी है..!!

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