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Category: शायरी

* कविता हर वर्ग के श्रमिक के सहास के लिये जो शरिरिक और मानषिक श्रम करते हैं * ✒️Ramrajy khanve✒️

हम है श्रमिक ये हमको नही भुलाना है। टूटी हुई अर्थवयवसथा को अब हमको हि पटरी पर लाना है।। हम है……………1 आसान नहि है पथ

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ज्योतिषी का प्रेम

वृषभ की ‘चंद्रमा’ है तू, मकर का मैं ओजस्वी ‘मंगल’ ये आँखें मदभरी तेरी, लगे हैं ‘बुध’ सा चंचल. ये यौवन ‘सूर्य’ पा दिग्बल, मचाता

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तुम शामे अवध हो

तुम शामे-अवध हो, मैं सुबहे-बनारस, आ कर लें दो मीठी, प्यार की बातें. मिले साथ तेरा, बन जाए ये जीवन, मदिर, मुस्कुराती, ‘मालवा’ की रातें.

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