शायरी-ओमकांति

शायरी-ओमकांति

रोकर हमने तुम्हे इसलिए देखा था,
क्योंकि ए आंखे कुछ कहना चाहती थी।
पर अबतो ए पलके भी परदा सी हो गई है , जो सारे अश्क छुपाए बैठी है।

 

   

ओमकांति

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