शायरी- धीरेंद्र पांचाल

शायरी- धीरेंद्र पांचाल

बिन पतझड़ गिरने लगी हैं पत्तियाँ अब साख से ,
हिचकियों का दोष क्या जब चली कटारी आँख से,
मिलने और बिछड़ने का भी एक सिलसिला जारी था,
तिलक कर लिया हमने भी उन चिट्ठियों की राख से ।

 

           धीरेंद्र पांचाल
         चन्दौली ,उत्तर प्रदेश

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comments
  • अविनाश पांचाल

    July 4, 2018 at 2:14 pm

    वाह बहुत सुंदर शायरी भईया जी

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