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शायरी-आनंद मिलन

चेहरा छुपाये दूपटा से,
मुँह मोड़कर जाया ना करो।
साथ तो चले है कुछ देर,
फिर अजनबी बनाया ना करो।

ये आँखों का खामोशी समझ,
जज्वात से तुम खेलाया ना करो।
मुझे अपनी होंठों से लगा लो,
गैर बना के ठुकराया ना करो।

हूशन ने लूटा है दिवानो को,
रिवाज तोड़कर जाया ना करो।
मैं समंदर बन जाऊँगा,
प्यार से इनकार किया ना करो।

ये गम अमानत है तेरी,
राज ये किसी से बताया ना करो।
धूप छाँव सी ये जिन्दगी है,
सत्य से इनकार किया ना करो।

 

Anand Milan

 

    आनंद मिलन

सिंघवाड़ा , दरभंगा

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Anand Milan

Anand Milan

मैं आनंद मिलन मुंबई से, मैं हास्य कवि और शायर हूँ। मैं फिल्म राईटर एशोसिऐशन और नव भारत टाइम्स रंगमंच क्लब का सदस्य हूँ। मुझे देश के विभिन्न शहरों में आयोजित "कवि सम्मलेन और साहित्य सम्मलेन" में जाने का अवसर मिला है। जहाँ मैंने अपनी टूटी-फूटी हास्य कविता, शेरों-शायरी और अपने विचारों से तालियाँ खूब बटोरी हैं मेरे लिखे गीतों का एल्बम बाजार तथा you tube पर उपलब्ध है। मेरे दवारा लिखी ई-बुक "ख्वाब ऐ मिलन" Amazon, instamojo और pothi.com पर online उपलब्ध है। इसे आप साहित्य लाइव से भी डाउनलोड कर सकते है। इस ई-बुक में शेरों - शायरी, गजल, कविता, और व्यंग्य और आलेख समाहित है। मेरी लिखी रचनाएँ देश के विभिन्न पत्र -पत्रिकाओं में समय-समय पर छपती रहती है। वर्तमान समय में साहित्य लाइव में सम्पादक के रूप में कार्यरत हूँ।

1 thought on “शायरी-आनंद मिलन”

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