शायरी- शोभा सृष्टि

शायरी- शोभा सृष्टि

उम्मीद की एक लौ मेरे अन्दर जलती है।
सपने देखते हुए कभी ना मेरी आँखे थकती है।
कोशिश और कशिश कायम है अभी तक।
क्योकि कामयाबी की किताब सच्ची कोशिश रचती है।

 

शोभा सृष्टि
 राजस्थान

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