शायरी – शुभम् लांबा

शायरी – शुभम् लांबा

माँ तेरे आशिषों ने ही जिन्दा रखा है मुझे,
दुनिया के खूलूस ने तो कब का मार दिया होता मुझे।

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शुभम् लांबा

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