वक्त पर शायरी-शोभा सृष्टि

वक्त पर शायरी-शोभा सृष्टि

बहुत वक्त से वक्त अनुकूल नहीं लगता।

क्योंकि हर वक्त डाली पर खिला** फूल** नहीं लगता।

बहुत वक्त गुजर गया झंझावतों से लड़ते अब बहुत दूर समुद्र का कूल(किनारा) नहीं लगता।

 

      शोभा सृष्टि
 करौली, राजस्थान

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