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जिन्दगी-हर्षदा पाचपोर

जिन्दगी पुस्तक के पन्नों की तरह है ।
पन्ना प्यार से और धीरे से पलटोगे
तो फटेगा नहीं ।
वैसे से ही जिन्दगी में प्यार से जिओगे
तो संभल जाओगे ।
अगर घुस्से से जियो गे तो
कागज के पन्नों की तरह बिखर जाएगी।

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