सुलगता समाज-रोहित कुमार

सुलगता समाज-रोहित कुमार

“हर तरफ द्वेष फ़ैल रही है आज ,
हर तरफ लोग लड़ रहे हैं,
जो लोग भूलकर मज़हब अपना ,
साथ बैठकर खाना खाया करते थे ,
आज क्या हो गया ऐसा जो वो मज़हब की बाते करने लगे हैं ,
ये वो भारत देश है अपना जिसमें लोग इंसानियत की बाते करते थे ,
और आज सब भूलकर इंसानियत अपना ,
हिन्दू-मुस्लिम कहकर लड़ रहे हैं ।
जो इतिहास है अपना भाई – चारा का ,
आज वो सौहार्द कहीं खो रहा हैं ,
और बस हमसब ! हिन्दू-मुस्लिम सोच रहें हैं ।
इंसानियत का दीवार आज हमसब मिलकर तोड़ रहें ,
प्यार , सौहार्द और इंसानियत से अपना नाता तोड़ रहें हैं ,
क्या सोचते होंगे वो लोग जो हमलोगों के लिए अपना जान गवायें हैं ,
एक कर्ज़ है उनका हमसब पर और हमसब इस तरह से उनका कर्ज़ चुका रहें हैं…
हर तरफ़….
हर तरफ़….

 

    Rohit Kumar

रोहित कुमार

       गया, बिहार

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