सुंदरता-मुकेश नेगी

सुंदरता-मुकेश नेगी

दर हो हर मन का सपना
जीवन मे हर शख्स हो अपना
बेशुमार दौलत हो चाहे
गुण संपन्न हृदय हो अपना ।

व्देष-भाव न ईर्ष्या हो मन मे
प्रेम-प्यार हो सब जीवन मे
रहे संग एक दूजे मिलकर
यही समर्पण हो हम सबमे ।

सुंदर हो मन की अभिलाषा
सुंदर हो जीवन मे आशा
कहे कोई कुछ रहे सदा चुप
यही संस्कृति यही हो भाषा ।

नम्र व्यवहार हो सबके भीतर
कोमल गुण हो सबमे बढ़कर
सुंदरता हो जीवन मे ऐसी
छूकर गुजरे सबमे होकर ।

झूठ-पाप से दूर रहे मन
कर्म सदा करे ये जीवन
यही निश्चय संकल्प हो सबका
तभी भरपूर्ण रहेगा ये तन।

 

   

मुकेश नेगी

रायवाला, देहरादून

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