तब जाकर के तुम मदर्स डे मनाना – होम कृष्ण राज

तब जाकर के तुम मदर्स डे मनाना – होम कृष्ण राज

तब जाकर के तुम मदर्स डे मनाना ।

जिस दशा में उसने तुम्हारे बचपन को संभाला है ,
बिना तेल वो दिये सी जलती सूर्य से तेज उजाला है ,
हर रिश्ते की बदली होती ये रिश्ता सबसे निराला है।

गांव में अकेली जहाँ रहती है वो एक बार वहां घूम आना ,
तब जाकर के तुम इस साल का मदर्स डे मानाना।

तुम्हारे लिए मुस्कान हमेशा भीतर कितने दर्द दबाए है ,
एक बच्चे को पालकर देखो पता चले कितने कष्ट उठाए है ,
ढाई साल तक तुम्हारे लिए न जाने कितने निवाले चबाए है।

इटली का जो पिज़्ज़ा खाते हो एक बार माँ को खिला आना ,
तब जाकर के तुम इस साल का मदर्स डे मानाना।

हमेशा तुम्हारी गलती पर भी पीछे तुम्हारे खड़ी थी ,
तुम्हारे लिए न जाने कितनी बार पापा से वो लड़ी थी ,
सुने नहीं हम बड़े हो गए पर वो हमेशा हमसे बड़ी थी।

आँचल में बैठकर उसके फिर छोटे होने का अहसास दिलाना ,
तब जाकर के तुम इस साल का मदर्स डे मानाना।

जितने देश तुम घूम लो आज लगते तुमको थोड़े है ,
तुम छोटे थे तुम्हारे लिए न जाने कितने फंग्शन छोड़े है ,
जहां से एक माँ गुजरी है कभी देखना उसमें कितने रोडे है।

जहां -2 भी घूमो “राज” उसे भी साथ जरूर घुमाना ,
फिर एक दिन नहीं यार हर रोज़ मदर्स डे मानाना।

Hom Krishan Rajहोम कृष्ण राज
मंडी, हिमाचल प्रदेश

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